Poems

स्कूटर और बचपन

बचपन की कुछ यादें आज फिर टेहलाई पापा के स्कूटर के सामने खड़े, वो सवारी फिर याद आई जब भी वो कहीं निकलते, भाग के स्कूटर पर चढ़ जाती वो घुस्सा करते भी तो, मनमानी कर घूम आती! स्कूटर की आवाज़ से उनके आने का पता चलता भाग के बाहर दरवाज़ा खोलने निकल जाती इसी …

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उड़ान – एक कविता

आज एक उड़ान भरने को जी चाहता है यह पंख फैलाने को जी चाहता है चीर के आसमानों को निकलना है इस हवा को सीने से लगाने को जी चाहता है कोई रोक रहा है मुझे मगर काया नहीं उसकी कोई एक एहसास है बेआवाज़ सा कहता है ,थम जा कि अभी उड़ान का समय …

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